Pulwama कहां है
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पुलवामा। गुरुवार को दोपहर करीब 3:30 बजे दक्षिण कश्मीर के पुलवामा से अचानक सीआरपीएफ कॉन्वॉय पर आतंकी हमले की खबर आई। पहले लोगों को लगा कि शायद कोई मुठभेड़ है लेकिन कुछ ही मिनटों बाद साफ हो गया कि हमला दशकों बाद घाटी में हुआ एक खतरनाक आतंकी हमला था जिसे 22 वर्ष के जैश-ए-मोहम्मद आतंकी आदिल अहमद डार उर्फ वकास ने अंजाम दिया था। आदिल 350 किलोग्राम विस्फोटक से भरी एक एसयूवी लेकर सीआरपीएफ जवानों से भरी बस से जाकर भिड़ गया और देखते ही देखते करीब 40 जवान शहीद हो गए। आदिल एक स्कूल ड्रॉपआउट था और किसी को यकीन नहीं हो रहा है कि एक मासूम से चेहरे वाला आदिल इतना घिनौना काम भी कर सकता है।
स्कूल ड्रॉपआउट था आदिल
आदिल पुलवामा जिले के गुंडीबाग गांव का रहने वाला था और पुलिस के रिकॉर्ड्स से इस बात की पुष्टि होता है। एक स्कूल ड्रॉपआउट आदिल जिसे लोग वकास के नाम से भी बुलाते थे, वह जैश का एक कमांडो था। 12वीं तक गुंडीबाग के लोकल स्कूल में पढ़ाई करने के बाद आदिल ने मार्च 2017 में स्कूल छोड़ दिया था। यह गांव उस जगह से बस 10 किलोमीटर ही दूर है जहां पर गुरुवार को हमला हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक डार, घाटी में कैटेगरी सी का आतंकी था और उसने साल 2018 में संगठन ज्वॉइन किया था। इस वर्ष वह पुलवामा से अचानक एक दिन गायब हो गया और फिर उसका कुछ पता नहीं चला।
एक दिन पाक से अचानक लौटा
गायब होने से पहले डार एक लोकल मिल में कुछ दिनों तक बतौर मजदूर काम कर रहा था। उसके पिता रियाज अहमद डार की इस इलाके में एक छोटी सी दुकान है। सूत्रों के मुताबिक आदिल, पाकिस्तान चला गया था। यहीं पर उसकी ट्रेनिंग हुई और चार माह पहले ही वह घाटी में वापस लौटा था। डार ने पाक में आईईडी की खास ट्रेनिंग हासिल की थी। गांववालों की मानें तो स्कूल से ड्रॉपआउट डार का चचेरा भाई भी एक आतंकी था और एक एनकाउंटर में मारा गया था। जैसे ही सुसाइड अटैक की खबर आई गुंडीबाग में डार के अंतिम संस्कार की तैयारियां होने लगीं। गांववालों ने अधिकारियों को भी जगह पर नहीं जाने दिया। डार, जैश में भर्ती हुआ तीसरा फिदायीन था।
कौन था घाटी का पहला सुसाइड बॉम्बर
डार से पहले त्राल के 16 वर्ष के फरदीन अहमद खान को जैश ने शामिल किया था। उसे 31 दिसंबर 2017 को एनकाउंटर में तीन आतंकियों के साथ सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया था। फरदीन ने पुलवामा स्थित सीआरपीएफ के ट्रेनिंग कैंप में दाखिल होने की कोशिश की थी। उस हमले में पांच जवान शहीद हो गए थे । इसके बाद अफाक अहमद शाह जो 17 वर्ष का था वह घाटी का पहला लोकल फिदायीन था। उसने साल 2000 में श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के हेडक्वार्टर्स के सामने खुद को उड़ा लिया था। उस हमले में आठ जवान शहीद हो गए थे। वह भी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था।









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